निःशब्द मैं
निःशब्द तुम
शब्द निकले भी तो क्या
वर्षों का पिटारा
अचानक कैसे खुले
वह भी
औरों के बीच
छिछोरों के बीच
हाँ
तुम्हारी आँखों में
मैंने
बहुत कुछ पढा
शायद
तुमने भी
देखा होगा
बहुत कुछ
मेरी आँखों में
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