काश!
तब कहा होता
किसी ने
यह
तो
मैं
मैं न होता
शायद
तब ही
हो जाता
फैसला
भाग्य का
प्रतीक्षा में ही
नहीं निकल जाता
जीवन
मिल जाता
पथिक को
छांव
यूँ
अंतहीन
तपन में
न गुजरता
जीवन सारा.
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