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पर्वत की ऊँचाई

                
                                                         
                            पर्वत की ऊँचाई को पाना
                                                                 
                            
किसी एक कदम की बात नहीं।
यह उन सैकड़ों कदमों की
असफलता का जोड़ है,
जिन्होंने स्वयं को शिखर पर
स्थापित करना चाहा था।
असफलताओं, निंदाओं और
लज्जा के बोझ से जब तुम्हारे
कन्धे झुक जाएँगे,
पांव डगमगाएंगे भी शायद।
पर जब तुम उस शिखर पर
अपने कदम रख दोगे,
तब संसार उन सैकड़ों कदमों
की कहानियाँ सुनाएगा।
और अमर कर देगा उनको।
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3 महीने पहले

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