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जमीन के अंदर

                
                                                         
                            आसमां में न सूरज है न चाँद
                                                                 
                            
सितारें भी नहीं है
है तो सिर्फ डरावने चमकते काले बादल
और जहाँ मैं हूँ उस जमीं पर
मेरे साथ कोई नहीं
है तो सिर्फ चीखती चिल्लाती सदाएं
जो आ रही है
चार फिट जमीन के अंदर से
वो लाशें जिन्हें कभी दफ़्न किया था मैंने
वो जाग गई है
वो कब्र फाड़ के बाहर आ गई है
मुझे नोंचने मुझे खाने
और मैं न हिल रहा हूँ न डुल रहा हूँ
बस देखे जा रहा हूँ
वहीं किसी काठ की तरह खड़ा हूँ
जैसे मैं चाहता हूँ
वो मुझे नोंचे खाय
और अपने साथ ले जाये
चार फिट जमीन के अंदर
- सतीश बोरकर
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2 महीने पहले

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