वो चिड़िया
जो चहकती थी
फुदकती थी
मेरे आँगन के बगीचे में
जो रौनक़ थी मेरे गुलशन की
जिसकी सदाएं
मुझे गुदगुदाती थी
हँसाती थी
जिसके आने की आहट से
जिसके पंखों के फड़फड़ाहाट से
दिल की तरंग
तबस्सुम बनकर होठों में उभरती थी
वही पेड़ की डाली है
वही पत्ते वही हरियाली है
फूल और फूलों की खुशबू भी वही है
नहीं है तो वो चिड़िया
वो एक डाल से
दूसरे डाल में उड़ते हुए
आसमान में बादलों के पीछे से
फुर्र हो गई
मेरी खुशी फुर्र हो गई
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