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एक एहसास

                
                                                         
                            गुजार दिए होंगे तुमने,कई दिन, महीने, साल.
                                                                 
                            
हमें भुला ना सकोगे वो सब याद हूँ मैं।
की होगी गुफ़्तगू तुमने कई दफ़ाकई लोगों से,
दिल पर जो लगेगी वो एक बात हूँ मैं।
नींद में जब तन्हा, खुद को तुम पाओगे,
अपने पन का एहसास जो करा दे।
वो एक एहसास हूँ मैं।
बिताये होंगे तुमने कई हसीन पल सबकेसाथ में,
हमें भुला नहीं पाओगे,वो एक याद हूँ मैं।

~ सार्थक पीयूष
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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