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उलझा देख तुमको मैं भी सुलझी रह नही पाती...

Ulajha Dekh Tumko Mai Bhi Suljhi Rah Nhi Pati
                
                                                         
                            गमोगुस्से से कोई बात क्यों कहतेहो तुम मुझसे
                                                                 
                            
मैं तो खामोशियाँ से ही तुम्हारी जी नही पाती

तुम्हारे ही खयालों में गुजर होती मेरे दिल की
मैं पलभर को अकेले दूर तुमसे रह नही पाती

कोई इल्जाम देने से सजा मिलती है मिल जाये
खुशी से जो भी देते हो मना मैं कर नही पाती

ये जाने कैसी बातें हैं जो मेरे साथ होती है
मुहब्बत ही है ये शायद जिसे मैं कह नही पाती

परेशां तुम जो होते हो मेरी सांसें उखड़ती हैं
तेरे माथे दिखे चिंता तो फिर मैं सो नहीं पाती

रहोगे साथ तुम मेरे अलग हो ही नही सकते
हो मेरी रूह में शामिल जुदा मैं कर नही पाती

कभी भी कोई उलझन हो मुझे सब बांध के देदो
उलझा देख तुमको मैं भी सुलझी रह नही पाती

तुम्हारे साथ है वो बंधन नही जो जीते जी टूटे
तुम्हारे बिन तसव्वुर एकपल का कर नही पाती

सरोज""सरु""

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8 वर्ष पहले

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