आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

रूबरू तुम मेरे नहीं होते तेरी तस्वीर साथ होती है

Rubaru Tum Mere Nahi Hote Teri Tasveer Sath Hoti Hai
                
                                                         
                            वक्त मिलता नही तुम्हे फिर भी मेरी हर रोज बात होती है
                                                                 
                            
रूबरू तुम मेरे नही होते तेरी तस्वीर साथ होती है

वक्त जो साथ बिताया तुमने मेरी दुनिया समा गई उसमे
एक सागर से लगे तुम मन को मैं थी दरिया समा गई जिसमें
अब अलग होके कुछ वजूद नही सांस रुकने सी बात होती है
रूबरू तुम मेरे नही होते तेरी तस्वीर साथ होती है

मैं शिकायत नही करती तब भी तेरी हर बात याद आती है
जो कहा था कभी मुहब्बत में उसकी हर याद अब रुलाती है
कितना भी खुद को संभालूं लेकिन बारिशें सारी रात होती हैं
रूबरू तुम मेरे नही होते तेरी तस्वीर साथ होती है

लग गया रोग फिर भी जिंदा है ये कयामत से कोई कम तो नही
इस तरह दर्द बसाया दिल मे देखो आंखे हमारी नम तो नही
मैने मुस्कान ओढ़ रखा है दिल में अश्कों से बात होती है
रूबरू तुम मेरे नही होते तेरी तस्वीर साथ होती है

वक्त मिलता नही तुम्हे फिर भी मेरी हर रोज बात होती है
रूबरू तुम मेरे नही होते तेरी तस्वीर साथ होती है

सरोज यादव सरु

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर