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लता लिपट के जो कानों में कह गयी तरु के

Lata Lipat Ke Jo Kano Me Kah Gayi Taru Ke
                
                                                         
                            लता लिपट के जो कानों में कह गयी तरु के
                                                                 
                            
वो झूम यूँ गया जैसे बहार आई हो
खुशी को जिसने भी देखा समझ गया खुद ही
मयूर के लिए जैसे कि घटा छाई हो
जिधर भी देखिए मौसम भी मेहरबान हुआ
चमकते जुगनू की जैसे बरात आई हो
ये बाग़ देखिए सजता है कैसे फूलों से
कली कली पे लगे जैसे खुसी छाई हो
मचल उठा है इन्हें देख देख मन सबका
हरेक मन मे जैसे ऋतु बसंत आई हो
धरा पे धानी चुनर सज रही नवेली सी
धरा दुल्हन लगे प्रीतम से मिलके आई हो

सरोज यादव

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8 वर्ष पहले

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