मेरे प्यार की कविता :-
मुझे तुम्हारी आंखों में
खूबसूरत हरे भरे जंगल
इत्मीनान से ठहरा अंबर
धरती के सिर पर लहराता समुंदर
नहीं दिखता |
ना हीं मुझे चांदनी दिखती है
ना ही उसकी शीतलता
ना बचपन , ना जवानी
और ना ही कोई सुंदरता |
मैं जब तुम्हें देखता हूं
मुझे तुम्हारी आंखों में
भूख दिखती है !
तड़पते लोग दिखते हैं
ठंडा चूल्हा दिखता है
जिसके मुहाने पर पड़ी आग
धीमे-धीमे सुलग रही है |
तुम कहती हो कि मैं इन्हें ना देखूं
आँख बंद कर लू और तुम्हें ना देखूं
खुदगर्जी का लिबास ओढ़कर सो जाऊ मगर
“ इस तड़पते आसमां से दर्द में काला पड़ा जो सूरज है
मुझे नहीं पता था ये आंखें है तुम्हारी !
" संतोष यदुवंशी "
मैं संतोष यदुवंशी बीएचयू से ग्रेजुएट और जेएनयू से पोस्ट ग्रेजुएट हूं | मेरा जीवन एक कलम है जिसका उद्देश्य लिखना है इसलिए जो रचनाएं मै भेजता हूं वह मेरी खुद की लिखी होती है.....इस खूबसूरत काव्य मंच को प्रदान करने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार |
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