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मैैैैयत

                
                                                         
                             स्वाभिमान की बेड़ियां है
                                                                 
                            
बोलो ! मेरे लिए खुली थी कब ?
इस छद्म भरे नाटक से हमको
पहले ही कर देते अलग
मेरे वजूद की मैयत पर
जो तुम दरबार सजाओगे
किसी का साथ निभाने के लिए
एक दिन तुम भी पछताओगे | |
~ संतोष यदुवंशी


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6 वर्ष पहले

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