जवानी
" ना संस्कृति , ना सभ्यता
और कोई मर्यादा नहीं है
जमाना जो सिखा दे
अब वो जमाना नहीं है
हाशिए-ए खुद का हश्र क्या होगा ?
हमें मालूम नहीं...
अब और जवां होने का मेरा इरादा नहीं है |
" संतोष यदुवंशी "
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