एक किसान का प्यार :-
" तुम पूछती हो ,
तुम प्यार पर कविताये क्यों नहीं लिखते ?
मैं लिखता हूं ,
हर दिन , हर क्षण तुम्हारे बारे में
आदिम सभ्यता की शुरुआत से प्रलय होने तक !
लेकिन प्रिये ,
हमारा प्यार जैसे - जैसे बढ़ता गया
दूसरों की नजरों में खटकता गया
इतना खटका कि हमारे प्यार पर ही
इस देश की संसद में राजनीति होती है !
शायद उन्हें नहीं पता ,
जब मैं तुम्हारे बालों में उंगलियां फेरता हूं
तो तुम कितनी खुश होती हो !
जब तुम मुझे अपने सीने से लगाती हो
तो मेरी धड़कन कितनी ज्यादा तेज हो जाती है
जब मैं तुम्हारे होठों को चूमता हूं
तो तुम्हारा कुछ हिस्सा मेरे होठों पर भी रह जाता है |
लेकिन जब हम प्यार करते है
तब ये लोग सो रहे होते हैं
सत्ता की नींद है या सत्ता की हवस
ना जाने क्यों हमे सोता हुआ देख
अचानक से इनकी नींद खुल जाती हैं ,और
फिर शुरू हो जाती है दो टकीये सदन में
हमारे बेशक़ीमती प्यार पे बहस |
मैं लिखूंगा हमारे प्यार के बारे में
आदिम सभ्यता की शुरुआत से प्रलय होने तक
ताकि पूरी दुनिया को पता चले , आखिर
वो कौन थी ??
जो रहने वाली गांव की थी मगर
पूरी दिल्ली उसका नाम पुकारती थी |
मैं पूछना चाहता हूं.....
तुम इतनी अच्छी क्यों हो ?
जो खूबसूरत होने के बावजूद भी
मुझसे अलग नहीं होना चाहती |
मैं पूछना चाहता हूं , आखिर
तुम्हारे अंदर ऐसा क्या है ? जो
तुमसे बिछड़ने के ख्याल मात्र से
हमलोग अपनी जान दे देते हैं | |
" संतोष यदुवंशी "
महाराष्ट्र के किसानों को समर्पित !
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