ये धर्म , ये संस्कृति
ये पावन सभ्यता
किसे तुम बरगला रहे हो ?
मैं तटस्थ देख रहा हूं...
धूप में खड़ा वह चुप है
तुम छांव में बैठे चिल्ला रहे हो
हम दुख ,वेदना सहन कर सकते हैं
मगर तुम्हारी बकवास नहीं
अब मुझे समझ में आया.....
एकलव्य ने अपना अंगूठा काटने से पहले
तुम्हारे भौंकते कुत्ते के जबड़े में बाण क्यों मारे थे ?
अंधेरे का मतलब झूठ होता है ,बोलकर
तुम हर साल दीप जलाते हो
लाखों-करोड़ों....अब तो और भी ज्यादा
लेकिन जब हम अपने अतीत को याद करते हैं
बार-बार उस अँधेरे को नमस्कार करते हैं |
तुम मुझे गाली दो ,
चाहे पिछड़ा, दलित ,अछूत कहो
तीनों मेरे ही नाम हैं....
जो मन चाहे करके देख लो
सत्य कभी टल नहीं सकता
मै आज जो हूं , जितना भी हूं
अब उससे कम नहीं हो सकता |
" संतोष यदुवंशी "
तमिलनाडू में हुई निंदनीय 17 दलित जनों की मौत पर
उनके संघर्ष एवं योगदान को याद करते हुए अश्रूपूर्ण श्रद्धांजली |
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