अगर शौक़ ही पालना है,
तो किसी की सहायता का पालो।
अगर जुनून ही रखना है,
तो निःस्वार्थ सेवा का पालो।
जो तुम्हें धर्म की राह पर ले जाए,
जो किसी के चेहरे पर मुस्कान लाए।
जो तुम्हारे जीवन को सार्थक बना जाए,
और तुम्हारे जाने के बाद भी
तुम्हारे सत्कर्मों में नज़र आए।
धन-दौलत सब यहीं रह जाएगी,
शरीर की मिट्टी भी एक दिन
मिट्टी में मिल जाएगी।
मगर जो सेवा तुमने दूसरों की की होगी,
वही तुम्हारी सच्ची पहचान बनेगी।
तुम भले ही इस दुनिया में न रहो,
मगर तुम्हारी नेकी लोगों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।
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