मैं यूँ ही टूटकर नहीं बिखरा,
मेरे अपनों ने ही चोट मारी है।
खून के रिश्तों में भी ज़हर होता है,
ये सच मैंने बहुत देर से जाना है।
जिन पर किया था दिल से ऐतबार,
अक्सर उन्हीं ने धोखा दिया है।
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