कौन कहाँ से आया,
और कहाँ चला गया—
ये सवाल था,
सवाल ही रह गया।
न जाने कितने महापुरुष
इस धरा पर जन्म ले गए,
किसी ने जीवन का रहस्य जाना,
तो उसे अपने साथ ले गए।
किसी ने सत्य को समझा,
किसी ने जीवन को पढ़ा,
किसी ने जग को राह दिखाई,
तो किसी ने मौन रहकर सब कुछ सहा।
पीढ़ियाँ बदलती रहीं,
कहानियाँ बनती रहीं,
पर उस अनंत यात्रा का रहस्य
आज भी वहीं का वहीं रहा।
हम भी आए हैं यहाँ,
कुछ पल ठहरने के लिए—
फिर एक दिन चले जाएँगे,
अपने पीछे बस कुछ यादें छोड़कर।
कौन कहाँ से आया,
और कहाँ चला गया—
ये सवाल था,
सवाल ही रह गया।
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