दिल से जब दुआ निकलती है,
वो ख़ुदा की मर्ज़ी में मिलती है।
तू करता रह यूँ ही भला दूसरों का,
तेरी नेकी एक दिन तुझे भी मिलती है।
जो बाँटता है खुशियाँ दूसरों के बीच,
उसकी झोली भी खुशियों से भरती है।
नेकी कभी बेकार नहीं जाती,
दुआ बनकर लौटती है,
और ज़िंदगी संवरती है।
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