क्या मिला करके शिकायत,
वो खुल के बेवफ़ाई करने लगे।।
कहते थे, तुम जिसे अपनी मोहब्बत,
उनको इक पल भी न लगा, तुमको भूलने में।।
चाहत जिसे तुम कहते थे जान की अपनी,
वो आज तुम्हें गुज़रा हुआ कल कहने लगे।।
क्या मिला करके शिकायत,
वो खुल के बेवफ़ाई करने लगे।।
तुम वफ़ाओं की हसरत में रह गए,
वो हो के बेवफ़ा, तुम्हें छोड़कर चलते बने।।
क्या मिला तुमको करके शिकायत,
वो यूँ खुलकर बेवफ़ाई करने लगे।।
तुम ठिठक कर वहीं रह गए,
वो देखते ही देखते तुमसे किनारा कर गए।।
तुम उनकी राहों में उम्मीद लिए बैठे रहे,
वो तुम्हारी राहों से ही गुज़रकर चले गए।।
तुम रिश्ते को आख़िरी साँस तक निभाते रहे,
वो एक पल में हर रिश्ता भुलाकर चले गए।।
तुम आज भी उसी मोड़ पर ठहरे हुए हो,
वो न जाने कितनी दूर निकलकर चले गए।।
-संजीव शर्मा ज़ख़्मी
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