आसमाँ पर तुम्हारा जो अभी गरूर है
ये फकत तख्त की ताकत का सरूर है
जब चल पड़े हज़ारों कारवाँ मिलकर
बढ़ना है आगे, नही रुकना मंजूर है
गूंज रहे है फ़िज़ा मे विप्लव के गीत
देख लेना अब, कहाँ मंज़िल दूर है l
छीन ना ले कहीं तुम्हारा तख्त ये दिवाने
इस बात का डर उनको जरूर है
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