आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

भ्रस्टाचार, छल, और जी हजूरी

                
                                                         
                            जब भ्रष्टाचार,छल,कपट और जी हजूरी
                                                                 
                            
हो गए संसार में इतनें जरूरी
तो अच्छी तरह से सबको आनें चाहिएं
बाकायदा सबको पढाऐ जानें चाहिएं
शिक्षा का उद्देश्य पूरा- कामिल होना चाहिए
पाठ्यक्रमों में आज इनको शामिल होना चाहिए
या पूर्णकालिक इनका कोई प्रशिक्षण होना चाहिए
योग्यता का इसमें भी परीक्षण होना चाहिए
बराबरी पर सबको पहले लाया जाना चाहिए
क्या और कितना करना है बताया जाना चाहिए
सिखाइए, परखिए और बाँटिए उपाधियाँ
फैल ही रही हैं तो फैलाइये ये व्याधियाँ
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
10 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर