"मित्रों को कभी भूल नहीं पाया,
और न ही कभी भूल पाऊँगा।
वक्त की तेज़ रफ़्तार ने भले ही राहें बदल दी हों,
पर दिल के किसी कोने में हर मित्र आज भी मुस्कुराता है।
कुछ रिश्ते मुलाक़ातों के मोहताज नहीं होते,
वे यादों की ख़ामोश किताब में हमेशा ज़िंदा रहते हैं।
यदि कभी मेरी ख़ामोशी ने दूरी का एहसास कराया हो,
तो उसे बेवफ़ाई नहीं, वक़्त की मजबूरी समझिए।
आप सभी मेरे जीवन की वह अमूल्य पूँजी हैं,
जिसे न समय कम कर सकता है,
न परिस्थितियाँ मिटा सकती हैं।"
-संजय श्रीवास्तव
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