"एक हसरत प्रेम की दिल में आज भी पलती है,
ख़ामोशियों के शहर में तेरी आहट टहलती है।
मिलना मुक़द्दर में हो या न हो, ये अलग बात है,
मगर दुआओँ में तेरी मुस्कान आज भी शामिल रहती है.... "
-संजय श्रीवास्तव
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