"मेरा नाम मिट गया, मेरी कविताएँ कहीं गुम हो गईं,
कुछ हद तक मैं भी खुद को भूल गया...
मगर तुम,
तुम आज भी मेरी यादों के उस कोने में बसी हो,
जहाँ वक्त भी कभी दस्तक नहीं दे पाया।"
-संजय श्रीवास्तव
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