लोग कहते हैं कि पत्थर होगा.....
न कोई दीवार –ओ- दर होगा
खुला आसमां मेरा घर होगा
ये कदम होंगे चाँद और सूरज
अब दिन रात का सफ़र होगा
देखिये ! मौत आयेगी कब तक
जीना इसी उम्मीद पर होगा
हमें न रोने की हिदायतें देगा
और खुद चश्मे – तर होगा
उठ गये हैं जो गरीबों के हाथ
अब दुआओं का असर होगा
रुख्सत होंगे अब गले मिलकर
कितना ग़मगीन मंजर होगा
दिल जो टूटने से बचाया हमने
लोग कहते हैं कि पत्थर होगा
-संजय कुमार
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