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थोड़ा सो लें यार

                
                                                         
                            रिक्शावाला सोया देखो,
                                                                 
                            
अपने रिक्शे पर पैर पसार।
उनकी किस्मत में लिखा है,
ढोना केवल जन का भार।

इसी सहारे चलता इनका,
रोजी-रोटी घर परिवार।
तेज धूप से हुआ निहाल,तो–
सोचा ‘थोड़ा सो ले यार।’

– संजय कुमार गुप्त ‘अबोध’
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एक घंटा पहले

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