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स्वतंत्रता की सफल लड़ाई

                
                                                         
                            पार सैकड़ा कर दादी मां,
                                                                 
                            
अब भी खुशियों से लबरेज।
इन आँखों में आज भी सिमटे,
हैं वह जुल्मी अगणित अंग्रेज।

वह दास्तान, वह हिंदी अंगड़ाई!
स्वतंत्रता की सफल लड़ाई।
जो गुजरा इन सौ वर्षों में,
देख-देख आँखें पथराई।।

– संजय कुमार गुप्त ‘अबोध’
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एक घंटा पहले

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