एक सपेरा देखो आया,
अपने संग कुछ साँप भी लाया ।
घूम-घूम कर बीन बजाता,
बजा-बजा के साँप नचाता।।
रिंकी, टिंकू, मुन्नी, पिंकू
सभी देखने आए साँप ।
गोलू, रेनू, गुड़िया, डबलू
सब बच्चों को भाए साँप ।।
गोल घेरे में सब हैं बैठे,
सभी देखते साँप का नाच।
धामिन, कोबरा, गेहुंअन करैत,
सांपों की संख्या कुल पाँच ।।
एक नागिन भी बक्से में है,
बैठी फन फैलाए ।
बीन बजाता जिधर सपेरा,
फन अपना वह उधर घुमाए ।।
खुश होकर के सारे बच्चे,
खूब बजाते ताली ।
बीन के धुन पे खूब नाचती,
जब नागिन हो मतवाली ।।
दूध पिलाने को सांपों को,
दिया लोगों ने कुछ पैसा ।
सबने कुछ न कुछ दिया,
था सक्षम जो जैसा ।।
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