पूरी दुनिया हो गई विकसित,
पर अपना यह हाल।
पूरा कुनबा इस गाड़ी पर,
मन में नहीं मलाल।
इसी बैलगाड़ी पर चढ़कर,
करते हैं हम सैर।
पिछड़े हैं पर खुश रहते हैं,
नहीं किसी से बैर।।
–संजय कुमार गुप्त ‘अबोध’
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