खेलो, कूदो, नाचो, गाओ
धमा चौकड़ी खूब मचाओ।
पढ़ लिखकर तुम नाम कमाओ,
पूरी दुनिया में छा जाओ।
दुखियों का दुख दूर भगाओ,
हर चेहरे पर खुशियां लाओ।
मेरे बेटे गोद में आओ,
पापा-मम्मी का दिल बहलाओ।।
–संजय कुमार गुप्त ‘अबोध’
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