काट दिए सारे वन-उपवन,
मानव का उत्पात मैं देखूं।
हमें बनाया घर से बेघर,
पशु बलि व नरसंहार मैं देखूं।
हम पक्षी ही नहीं जगत में,
हैं नर से नर हैरान मैं देखूं।
छोड़ मानवता का अद्भुत पथ,
इंसान बना हैवान में देखूं।।
– संजय कुमार गुप्त ’अबोध’
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