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फिर भी है मुंह बंद

                
                                                         
                            मंत्री स्वतंत्र, नेता स्वतंत्र,
                                                                 
                            
मां-बाप और बेटा स्वतंत्र।
टीचर, फटीचर, ऑफिसर स्वतंत्र,
लूटने, चूसने, नोचने को।
पूरी दुनिया वाले स्वतंत्रता,
बोझ ढोता, मार सहता,
राजनीति, चाटुकारिता न बुराई करता
फिर भी है मुंह बंद।।

–संजय कुमार गुप्त 'अबोध’
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53 मिनट पहले

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