इन अनाज के दानों में,
अक्षय ऊर्जा है मौजूद।
बिना अनाज को ग्रहण किये,
जीवन का है नहीं वजूद।
अथक परिश्रम से कृषकों के,
होता है तैयार अनाज।
कोटि पेट की क्षुधा मिटाता,
धन्य, धन्य तूं धन्य अनाज।।
– संजय कुमार गुप्त ‘अबोध’
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