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भोजन अन्न पकाती आग

                
                                                         
                            ठंडक दूर भगाती आग,
                                                                 
                            
तनिक नहीं शर्माती आग।
पानी को गर्माती आग,
भोजन अन्न पकाती आग।

अगर हो जाए जो थोड़ी चूक,
गाँव के गाँव जलाती आग।
पड़े कड़ाके की ठंडक जब,
जन की जान बचाती आग।।
–संजय कुमार गुप्त ‘अबोध’
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55 मिनट पहले

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