मेरे बेटे आ जाओ तुम,
मेरे मन को हर्षाओ तुम।
मधुर-मधुर मुस्काओ तुम,
सबका दिल बहलाओ तुम।
पढ़ लिख कर विद्वान बनो,
दुखियों का संताप हरो।
प्रेम सुधा हर दिल में बरसे,
ऐसा सुंदर सत्कर्म करो।।
–संजय कुमार गुप्त ‘अबोध’
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