वो कुछ अलग दौर था,
दुख तो तब भी थे पर शायद तू कोई और था।
उस वक्त ग़ैर होकर भी वो अपनापन दिखता था,आज अपने होकर भी ग़ैर हैं हम।
उस वक्त जिस आँखों में तुझे आँसू बर्दाश्त नहीं थे,वो आँखें आज हैं नम।
उस वक्त स्वीकृति थी, हर बात पर मेरा अधिकार था,
आज ऐसा लगने लगा है, जैसे ये रिश्ता ही कोई उधार था।पहले तुम्हें भरोसा था मुझपे, शब्दों में नम्रता थी।
अब क्या हो गया मुझे समझ नहीं आ रहा,जो भी हुआ... उसमें मेरी क्या खता थी।
अब बस चाहती हूँ दुनिया में कोई इंसान मुझसे इतना प्यार करे, कि जब सब छोड़ जाएं मुझे, वो तब भी मेरा इंतज़ार करे
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