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पककर धूमिल हुए सफेद दिखें बाल

                
                                                         
                            पककर धूमिल हुए सफेद दिखें बाल
                                                                 
                            
कपोलों के भीतर धँस गया है गाल
माथे की सिलवटें बनती है झुर्रियां
समापन से करीबी जीवन से दूरियां
रेखा चित्र अस्थियों का हो रहा प्रत्यक्ष
ऊर्ध्वाधर पुरानी काया बन गई है अक्ष
कंपकंपाता कदम मुश्किल से बढ़े आगे
जब सोती है दुनिया हम चिंता में जागे
सुनता ही नहीं कोई अनुभवों को जबानी
पीढ़ी के अंतर में हुई हर बात ही बेमानी
अपने ही बसेरे में हम बन गए मेहमान
मेरी उपज बनाती मेरे विदाई का प्लान
वृद्धाश्रम भेजोगे सुनियोजित हो आप
रुको चंद पल और सोचो मेरे बाप
शांत कर लो मन रोक लो हलचल
जो है मेरा आज वही होगा तेरा कल
मत फेंक पाठ में कांटे जो चुभें तुझको कल
सजा भविष्य अपना हमें भी साथ लेके चल
प्यार दे उनको भी जो हैं तेरे स्रोत
जीवन से लें विदाई हो खुशियों से ओत-प्रोत
जब जन्म पर किसी के मना सकते हो बधाई
क्यों नहीं खुशी से दे सकते हो विदाई
-कुँवर संदीप सिंह
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3 महीने पहले

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