नदिया और अब न बहना
नदिया और अब न बहना, नदिया अब तो रूक के रहना
नदिया बसा रहने दे अपना गाँव, मत पड़ने दे अपनी छाँव
नदिया बहुत बह चुका है , नदिया बहुत ढह चुका है
नदिया बचा रहने दे ये पड़ाव, महसूस मत कर अभाव
नदिया और कितना लेगी, नदिया औरों को क्या देगी
नदिया बचा रहने दे आस पास, अब तो बुझा ले अपनी प्यास
नदिया मान रख अपना, नदिया शान रख अपना
नदिया रोक औरों का संहार, मान अपनों के दे दे अपना प्यार
नदिया तोड़ न मर्यादा, नदिया और बह न ज्यादा
नदिया असम नेपाल को बिगाड़, और आगे पाँव मत काढ़
नदिया बस अब बस, ले तू और न अब कश
नदिया बचा अपना औरों का संसार, अरज करे ये संसार
नदिया और अब न बहना ……………….
-संदीप सिंह कुँवर
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