मत उलझो औरों में जाकर
अपना कम करो मन लाय
पीछे किसी के नहीं पड़ना है
एक दो बार दो बात बताय
जो जिसके मन को भाया है
उसी की बातें उसको भाय
बात तुम्हारी सही भी हो
तो भी उसको मिर्ची लग जाय
उसे भुला दो जो सीखे हो
हुआ पुराना अब वह भाय
ज्ञान वही चल पाता है जो
जाने कैसे सके पटाय
जिसे कमाई से मतलब है
मत तो उसे कम का ज्ञान
बात रहेगी सही मगर वह
कर देगी उसको हैरान
देखे को अनदेखा कर दो
सुनकर करो अनसुना खेल
मत उलझो औरों में जाकर
बना रहे खुशियों से मेल
-कुँवर संदीप सिंह
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