कैसे हारा संजीत है अजीत से यहाँ
ममता ने खुद को कैसे संभाला नहीं
गैरों की चाह में कैसे छूटे अपने
बदनीयत पर गिरा कैसे पाला नहीं
-कुँवर संदीप सिंह
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X