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कहीं भी टपक सकता है

                
                                                         
                            लार तरल है कहीं भी टपक सकता है
                                                                 
                            
मन चंचल है कहीं भी बहक सकता है
सम्भालो इसे दुनिया नहीं सहज इतनी
इस बात को मत समझना महज इतनी
-कुँवर संदीप सिंह
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2 महीने पहले

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