लार तरल है कहीं भी टपक सकता है
मन चंचल है कहीं भी बहक सकता है
सम्भालो इसे दुनिया नहीं सहज इतनी
इस बात को मत समझना महज इतनी
-कुँवर संदीप सिंह
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