जिसे ढूँढता था कल तक ये मन
उससे क्यों आज ये भागता है
बेचैन था जिसके लिए कल तक
क्यों उससे आज ये भागता है
-कुँवर संदीप सिंह
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X