दिन-रात दोनों का साथ है जीवन
मिले उजाला सदा यह जरूरी नहीं
रात को भी स्वीकारो उतने ही प्रेम से
यही देती दिन को मोल उसका सही
-कुँवर संदीप सिंह
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