समझदार होशियार बुद्धिमान
जब कारनामों से बनते हैं चालाक
हो जाते हैं ढाक के तीन पात
दिखावे में करें कितनी भी उछल कूद
कभी नहीं होती उनकी कहीं कोई पूछ
-कुँवर संदीप सिंह
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