समझता शेर है खुद को
मगर बिल्ली से डरता है
नहीं अपमान और न ही
किसी खिल्ली से डरता है
सिर्फ कुर्सी की चिंता है
और कुर्सी की ही खुमारी
चले इनकी कमाई यूं
चले इनकी दुनियादारी
-कुँवर संदीप
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X