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आजादी किस काम की

                
                                                         
                            आजादी किस काम की है
                                                                 
                            
जहां पंख ना अपने सको पसार
पहुंच सको ना मंजिल पर
बस मन ही कर पाओ तैयार
रहे ख्वाब बस ख्वाब बना
वह नहीं कभी पूरा हो पाय
रहे तमन्ना दिल में जो बस
नहीं धरातल पर खिल पाय
अपने मन की सोच सको ना
पर मन ही हावी हो जाए
लगे दौड़ बस उसी दिशा में
जिसका अंत समझ ना आय
कैसे पढ़ोगे कहां बढ़ोगे
इसका नहीं तुम्हें है ज्ञान
यही विरोधाभास कुँवर को
करता है प्रतिफल हैरान
समझ नहीं पाए हो खुद को
औरों की ही नकल व दौड़
कब तुम्हें सही समझ आएगी
कब तुम बन पाओगे प्रौढ़
यही है चिंता सदा कुँवर की
करती रहे उसे बेचैन
जब तक तुम ना संभल सकोगे
कैसे उसको मिलेगा चैन
ना है हमारी न है तुम्हारी
राष्ट्र की चिंता है दिन रैन
जीतना चाहते जंग अगर हो
धार को अपने कर लो पैन
मात बहको ऐसी लालच में
जो दे बस कुछ दिन का साथ
और कुछ दिन में छोड़ दो तुमको
होने लगे दुख की बरसात
वही सही है आजादी जो
चिंता से कर दे आजाद
रहे सुकून भरा जीवन में
अपने पराये सब आजाद
अमर शहीदों ने जीता था
आजादी की जग कठोर
मत जिंदा रहने दो अब तुम
किसी गुलामी किसी ठौ
पढ़ो लिख लो समझ बना लो
जीवन चले तुम्हारी चाह
रहे खुशी की बौछारें ही
ना आने पे कभी आह
केंद्रीय ऐसे बन जाओ तुम
हिंदुस्तान में हो पहचान
बढ़ा सके केंद्रीय विद्यालय
अपने तिरंगे का सम्मान
पढ़ो लिखो व समझ बना लो
जीवन चले तुम्हारी चाह
रहे खुशी की बौछारें ही
ना आने पे कभी आह!
केंद्रीय ऐसे बन जाओ तुम
हिंदुस्तान में हो पहचान
बढ़ा सके केंद्रीय विद्यालय
अपने तिरंगे का सम्मान
कूच बिहार ही राष्ट्र विहार हो
तेरे कदमों को हो छाप
जहां जाओ तारीफ तुम्हारी
ऐसे खास बन जाओ आप
मर्यादा का ध्यान रखो और
रखो सदा अपना सम्मान
कभी ना ऐसा काम करो
औरों में घट जाए सम्मान
अपनों को अपना ही मानो
घर परिवार या देश की बात
रखो आत्म सम्मान सुसज्जित
औरों को दो यही सौगात
मत भटको रास्ते से कभी भी
भटक जाओ तो लोटो शीघ्र
तुम्हें मिले खुशियों का मेला
यही कुंवर की ख्वाहिश शीघ्र
आजादी हेतु दिल से मुबारक
लुटा रहा हूं मैं पुरजोर
केवी बीएसएफ गांधीनगर का
मचा दो पूरे जग में शोर
-कुँवर संदीप सिंह
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2 महीने पहले

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