आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मुझ को अपने पास बुला ले यार इलाही।।

                
                                                         
                            मुझ को अपने पास बुला ले यार इलाही।।
                                                                 
                            
थक गया हूँ अब चलते चलते यार इलाही।।

कोई नहीं है यहाँ किसी का देख लिए सब,,
पत्थर में अब आस दिखा दे यार इलाही।।

सोचा था सब अच्छा होगा लेकिन ये क्या,,
बहुत हुआ अब लाश बना दे यार इलाही।।

दिल की धड़कन ही जब थक कर सो गई,,
मुझको भी अब कहीं सुला दे यार इलाही।।

तू चाहे तो पल भर में क्या हो नहीं सकता,,
सूरज को कोई चाँद दिखा दे यार इलाही।।

सारी उम्र लगेगी यहाँ तो सब कुछ पाने में,,
तू ही कुछ सही काम करा दे यार इलाही।।

अपनी मर्ज़ी से यां कोई क्या जी पाए देव,,
बुझते दिए को तू ही जला दे यार इलाही।।
-सुनील देव
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर