मुझ को अपने पास बुला ले यार इलाही।।
थक गया हूँ अब चलते चलते यार इलाही।।
कोई नहीं है यहाँ किसी का देख लिए सब,,
पत्थर में अब आस दिखा दे यार इलाही।।
सोचा था सब अच्छा होगा लेकिन ये क्या,,
बहुत हुआ अब लाश बना दे यार इलाही।।
दिल की धड़कन ही जब थक कर सो गई,,
मुझको भी अब कहीं सुला दे यार इलाही।।
तू चाहे तो पल भर में क्या हो नहीं सकता,,
सूरज को कोई चाँद दिखा दे यार इलाही।।
सारी उम्र लगेगी यहाँ तो सब कुछ पाने में,,
तू ही कुछ सही काम करा दे यार इलाही।।
अपनी मर्ज़ी से यां कोई क्या जी पाए देव,,
बुझते दिए को तू ही जला दे यार इलाही।।
-सुनील देव
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