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सज़ा है इश्क़

                
                                                         
                            रातभर जगता है दिल, वो सज़ा है इश्क़।।
                                                                 
                            
दिल के कोने में बसी इक अदा हैं इश्क़।।

जिसने किया नहीं, उसे क्या ख़बर इसकी,,
इक ख़ामोश निगाह की इब्तिदा है इश्क़।।

जिसने भी कर लिया सब कुछ लुटा दिया,,
बादशाहों के लिए तो इक बद्दुआ है इश्क़।।

हिज्र की आँच में तप कर बन गया सोना,,
जो डर गया करने से उससे खफ़ा है इश्क़।।

सवाल मत पूछना के कुछ मिला या नहीं,,
जिसने भी कर लिया आज ख़ुदा हैं इश्क़।।

ताकत से अगर मिलता तो मिल नहीं जाता,,
क़िस्मत की लकीरों में कहीं छुपा है इश्क़।।

क़ब्र तक साथ जाएगा, गर मिल गया ये देव,,
कहने को इश्क़ हैं, लेकिन बेवफ़ा है इश्क़।।
-सुनील देव
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2 महीने पहले

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