गुनाहों के सफ़र में कौन किसका साथ देता है।।
अगर प्यासा मुसाफ़िर हो तो मटका साथ देता है।।
गली के मोड़ पे चलते है जो रुक रुक यहाँ यारों,,
अगर कोई हाल ना पूछे तो गमछा साथ देता है।।
यहाँ सब वादे है वादों का क्या सब झूठे होते है,,
अगर कुछ दर्द बढ़ जाए तो सदमा साथ देता है।।
कोई मंदिर हो मस्ज़िद हो कलीसा या गिरजा हो,,
अगर दिल में नहीं रहम तो रब ना साथ देता है।।
यहाँ सब खेलते हैं खेल अपनो से ही छुप छुप के,,
कहाँँ किसको पड़ी किसकी सदक़ा साथ देता है।।
अगर जाना पड़े कहीं दूर तो तू हिफ़ाज़ती रखना,,
बुरा गर वक़्त आ जाए तो हँसिया साथ देता है।।
यहाँ कितनी हवेली है इससे क्या फ़र्क़ पड़ता देव,,
अगर 'उस्रत के दिन आए तो सस्ता साथ देता है।।
-सुनील देव
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