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संगीत बन गए

                
                                                         
                            पत्थर से अश्क़ निकले तो शिलाजीत बन गए।।
                                                                 
                            
अल्फ़ाज़ दिल को छूकर बोल संगीत बन गए।।

आवाज़ देकर देख ली कोई आया ना देखने,,
ठोकर लगी जब इश्क़ में तो जगजीत बन गए।।

दहशत में कट गई है कुछ वहशत में कट गई,,
जो कुछ कमाये याद के पल अतीत बन गए।।

रहबर नहीं मिला मगर हरसूं अफवाहें ही रही,,
मोहब्बत में क्या घुला ज़हर ग़म गीत बन गए।।

रागों में राग़ भैरवी देव बाकी मल्हार ही तो है,,
जब से सुना है ज़हन ओ दिल हबीब बन गए।।
-सुनील देव
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3 महीने पहले

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